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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
मातृत्व पहचान का निर्माण: स्व, समाज और संघर्ष के बीच परिचय
Authors
Sreeja K, Dr. Abdul Jabbar M
Abstract
मातृत्व को अक्सर एक स्वाभाविक और स्त्री जीवन का परम कर्तव्य माना जाता है। लेकिन जब हम श्पहचानश् के निर्माण की बात करते हैं, तो मातृत्व केवल बच्चे को जन्म देने की क्रिया नहीं रहता, बल्कि यह एक जटिल सांस्कृतिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक संरचना बन जाता है। यह विषय व्यक्तिगत चेतना, इच्छाएँ, परंपराएँ, अपेक्षाएँ, रूढ़ियाँ और संघर्ष के बीच के धागों से बुना गया है। इस अध्ययन का उद्देश्य यह समझना है कि मातृत्व एक शारीरिक अनुभव नहीं, बल्कि एक सामाजिक रचना है, जिसमें समाज माँ की पहचान को त्याग, कर्तव्यपरायणता और सर्वगुणसंपन्नता के साँचे में ढाल देता है। इस प्रक्रिया में महिला का अपना श्मैंश् अक्सर दब जाता है, खो जाता है या फिर टकराव में चला जाता है। महिला अपने भीतर माँ बनने की सामाजिक आकांक्षा और अपने व्यक्तित्व, करियर, शरीर पर अधिकार और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संघर्ष करती है।
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Pages:13-15
How to cite this article:
Sreeja K, Dr. Abdul Jabbar M "मातृत्व पहचान का निर्माण: स्व, समाज और संघर्ष के बीच परिचय". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 13-15
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