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VOL. 12, ISSUE 2 (2026)
डॉ० दिनेश कुशवाह का काव्य संग्रह ‘इसी काया में मोक्ष’ : समकालीन जीवन, श्रम और संवेदना का काव्य-दस्तावेज
Authors
मोनिका
Abstract
कवि मूलतः एक सजग द्रष्टा होता है। वह समाज में घटित होने वाली घटनाओं को संवेदनशील दृष्टि से देखता है और उन्हें अपनी अनुभूति में रूपांतरित करता है। इसी कारण उसकी रचनाएँ सामान्य मनुष्य के अनुभवों से जुड़ी होने के बावजूद व्यापक सामाजिक अर्थ ग्रहण कर लेती हैं। डॉ. दिनेश कुशवाह की कविताओं में यही विशेषता दिखाई देती है। वे समाज के यथार्थ को ईमानदारी से प्रस्तुत करते हैं और अपने काव्य के माध्यम से पाठकों को सोचने के लिए प्रेरित करते हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र समकालीन हिंदी कविता के सशक्त हस्ताक्षर डॉ. दिनेश कुशवाह के काव्य संग्रह इसी काया में मोक्ष के आलोक में उनके सामाजिक, राजनैतिक और मानवीय सरोकारों का विश्लेषण किया गया है। कुशवाह की कविताएँ केवल शब्दों का विन्यास नहीं हैं, बल्कि वे समाज के हाशिए पर खड़े व्यक्ति की जिजीविषा और संघर्ष का दस्तावेज हैं। इस आलेख में उनकी कविताओं में व्याप्त रागात्मकता, ओज और यथार्थवाद के अंतर्संबंधों को रेखांकित करने का प्रयास किया गया है।
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Pages:45-47
How to cite this article:
मोनिका "डॉ० दिनेश कुशवाह का काव्य संग्रह ‘इसी काया में मोक्ष’ : समकालीन जीवन, श्रम और संवेदना का काव्य-दस्तावेज". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 2, 2026, Pages 45-47
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