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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
आदिवासी लोकगीत और खड़ीबोली लोकगीत का तुलनात्मक अध्ययन
Authors
डॉ. झुनुबाला खुण्टिआ
Abstract
आदिवासी लोकगीत अनेक जाति और भाषा में पाए जाते हैं इसलिए उसके अनेक रूप होते हैं यद्यपि उन रुपों में अनेक समता और विसमता देखने को मिलता है;जबकि खड़ीबोली लोकगीत एक ही जाति और एक ही भाषा में होने के कारण उसका रूप एक होता है। आदिवासी और खड़ीबोली लोकगीत दोनों ही साहित्य, वाचिक परंपरा को आधार बनाकर अपने पुरखों से भावी पीढ़ी तक पीढ़ी-दर पीढ़ी हस्तान्तर होती रहती है, जिसमे उनके सामुदायिक जीवन दर्शन देखने को मिलता हैं। दोनों लोकगीतों में प्रकृति केंद्र में है। सामुदायिक चेतना और समतामूलक भाव देखने को मिलता है। खड़ीबोली के संस्कार गीत और आदिवासी के ऋतु गीत में इसका प्रमाण देखने को मिलता है। अपने अस्मिता और अधिकारों के लिए प्रतिरोध और विद्रोह के स्वर के साथ-साथ सांस्कृतिक समीकरण के चलते कथ्य और शैली में भी समता देखने को मिलता है।
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Pages:18-20
How to cite this article:
डॉ. झुनुबाला खुण्टिआ "आदिवासी लोकगीत और खड़ीबोली लोकगीत का तुलनात्मक अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 18-20
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