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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
महाभारत का आधुनिक पुनराख्यान: ‘महासमर’ में अभिव्यक्त समकालीन सामाजिक चेतना
Authors
सुश्री पार्वती बारिक, डॉ. स्नेहलता दास
Abstract
प्रस्तुत शोध आलेख आधुनिक हिन्दी साहित्य के मूर्धन्य रचनाकार नरेंद्र कोहली के बहुचर्चित महा-उपन्यास ‘महासमर’ में अंतर्निहित सामाजिक चेतना का समालोचनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। पौराणिक कथा-आख्यानों को आधुनिक युगीन संदर्भों, मानवीय मूल्यों और सामाजिक समस्याओं से जोड़कर पुनःसृजित करना कोहली जी की औपन्यासिक कला का मुख्य केंद्र रहा है। यह आलेख यह विश्लेषित करता है कि किस प्रकार ‘महासमर’ मात्र अतीत का गान न होकर वर्तमान समाज की विसंगतियोंकृजैसे वर्ग-शोषण, वर्ण-व्यवस्था की सीमाएं, विवाह संस्था का द्वंद्व, नारी का बहुस्तरीय उत्पीड़न, पारिवारिक विघटन, वृद्ध विमर्श एवं पर्यावरणीय असंतुलन का समाधान खोजने का एक सशक्त अकादमिक उपक्रम है।
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Pages:179-180
How to cite this article:
सुश्री पार्वती बारिक, डॉ. स्नेहलता दास "महाभारत का आधुनिक पुनराख्यान: ‘महासमर’ में अभिव्यक्त समकालीन सामाजिक चेतना". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 179-180

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महाभारत का आधुनिक पुनराख्यान: ‘महासमर’ में अभिव्यक्त समकालीन सामाजिक चेतना | International Journal of Hindi Research