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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 12, ISSUE 3 (2026)
विद्यापति का हिंदी कृष्ण-भक्ति काव्य पर प्रभाव : एक शोधपरक अध्ययन
Authors
सीमा झा, डॉ. चंदन कुमार श्रीवास्तव
Abstract
मध्यकालीन भारतीय साहित्य में भक्ति आंदोलन ने साहित्यिक अभिव्यक्ति, धार्मिक चेतना तथा लोक-संस्कृति को गहरे स्तर पर प्रभावित किया। इस व्यापक परंपरा में मैथिल कोकिल विद्यापति का स्थान विशिष्ट है। वे संस्कृत, अवहट्ट और मैथिली के समर्थ रचनाकार थे और उनकी पदावली ने मैथिली साहित्य के साथ-साथ उत्तर भारतीय भक्ति-काव्य की भावभूमि को भी प्रभावित किया। यद्यपि विद्यापति मूलतः शिवभक्त थे, उनके काव्य में राधा-कृष्ण के प्रेम, माधुर्य, संयोग-वियोग तथा आत्मीय भक्ति की अत्यंत प्रभावशाली अभिव्यक्ति मिलती है। उनकी काव्य-दृष्टि में लौकिक प्रेम और आध्यात्मिक अनुभूति के बीच एक स्वाभाविक संबंध स्थापित होता है।
प्रस्तुत शोध-पत्र में हिंदी कृष्ण-भक्ति काव्य के विकास में विद्यापति के योगदान तथा उनके प्रभाव का विस्तृत अध्ययन किया गया है। अध्ययन का विशेष केंद्र लोकभाषा, गीतात्मकता, राधा-कृष्ण प्रेम, माधुर्य-भाव, संयोग-वियोग, लोक-संस्कृति और मानवीय संवेदना है। विद्यापति की पदावली की गेयता ने उनके काव्य को व्यापक लोक-स्वीकृति प्रदान की और उनकी भाव-परंपरा आगे चलकर कृष्ण-भक्ति के विविध कवियों में विकसित हुई। सूरदास, नंददास, मीराबाई, रसखान तथा अन्य कृष्ण-भक्त कवियों की काव्य-संवेदना के अध्ययन में विद्यापति की पूर्ववर्ती भूमिका महत्वपूर्ण दिखाई देती है। इस प्रकार विद्यापति को हिंदी कृष्ण-भक्ति काव्य की महत्वपूर्ण पूर्वपीठिका निर्मित करने वाले कवि के रूप में समझा जा सकता है।

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Pages:191-196
How to cite this article:
सीमा झा, डॉ. चंदन कुमार श्रीवास्तव "विद्यापति का हिंदी कृष्ण-भक्ति काव्य पर प्रभाव : एक शोधपरक अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 3, 2026, Pages 191-196

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विद्यापति का हिंदी कृष्ण-भक्ति काव्य पर प्रभाव : एक शोधपरक अध्ययन | International Journal of Hindi Research