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International Journal of
Hindi Research
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VOL. 12, ISSUE 4 (2026)
उत्तराखण्ड राज्य के जौनसार क्षेत्र का लोकसाहित्यए लोककथाओं, लोकगाथाओं एवं लोकगीतों का अध्ययन
Authors
रीता शर्मा, डॉ० शुभा मटियानी
Abstract
इस षोध्ा पत्र में जौनसार क्षेत्र के  लोकसाहित्यए लोककथाओं, लोकगाथाओं एवं लोकगीतों का अध्ययन किया गया है। लोक साहित्य की परम्परा उतनी ही प्राचीन मानी जा सकती है, जितनी मानव जाति की है। जन संस्कृति का जैसा सच्चा तथा संजीव चित्रण लोक साहित्य में उपलब्ध होता है वैसा अन्यत्र नहीं मिलता है। सरलता, स्वभाविकता और सरसता के कारण यह अपना एक विशिष्ट महत्व रखता है। लोक साहित्य लोक जीवन का सजीव अनगढ़ और अत्यन्त प्राचीनतम माध्यम है जिसमें लोक और जीवन में साहित्य का तादात्मय सम्भव होता है। लोक साहित्य की अर्थगत व्याप्ति अत्यन्त विस्तृत है। यह किसी व्यक्ति विशेष द्वारा नहीं होता। इसके पीछे परम्परा वर्तमान रहती है. जिसका सम्बन्ध समाज से है। इसकी अभिव्यक्ति सामूहिक होती है वे सारी मौखिक अभिव्यक्ति जो व्यक्ति के व्यक्तित्व के कटघरे के बाहर की हैं, तथा जो समान रूप से समाज के आत्मा को व्यक्त करने की क्षमता रखती हैं, लोक साहित्य की श्रेणी में आती है। हिन्दी साहित्य और वांड्यम के सर्वागीर्ण विकास और समृद्धि में लोक साहित्य का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। वस्तुतः हिन्दी साहित्य की सतत प्रवाहमान धारा में लोक साहित्य की अनेकानेक धारायें मिलकर उसे सार्वजनिक और मंगलकारी बनाने का उपक्रम प्रारम्भ से ही करती आ रही है और यह उपक्रम अविच्छिन्न रूप से चलता रहेगा। हिन्दी समिति उत्तर प्रदेश शासन ने हिन्दी साहित्य के उन्नयन के लिए अब तक ज्ञान-विज्ञान के अनेकानेक प्रकाशन करके हिन्दी जगत को समर्पित किये हैं, और साथ ही विभिन्न प्रादेशिक लोक साहित्य यथा राजस्थानी, महाराष्ट्र लोक साहित्य, बुन्देलखण्डी, लोक साहित्य, गढ़वाली लोक साहित्य, हिमाचली, लोक साहित्य, कश्मीरी लोक साहित्य, कुमाऊंनी, बंगला लोक साहित्य, तेलुगु लोक साहित्य आदि अनेक भाषाओं के अपने लोक साहित्य की पुस्तकें प्रकाशित की है। जौनसार क्षेत्र  लोकसाहित्यए लोककथाओं, लोकगाथाओं एवं लोकगीतोंसे संमपन्न है जिसके संरक्षण की आवष्यकता है।

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Pages:20-30
How to cite this article:
रीता शर्मा, डॉ० शुभा मटियानी "उत्तराखण्ड राज्य के जौनसार क्षेत्र का लोकसाहित्यए लोककथाओं, लोकगाथाओं एवं लोकगीतों का अध्ययन". International Journal of Hindi Research, Vol 12, Issue 4, 2026, Pages 20-30

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